खुद को ढूंढ रही हूं..!!


कभी खुले आसमान के नीचे,
कभी बंद कमरे के भीतर,
कभी बातों की महफिल में,
कभी अकेलेपन के सन्नाटे में,
खुद को ढूंढ रही हूं..
कभी बहती नदी के किनारे,
कभी सूखे कुए के पास,
कभी संगीत की मधुर धुन में,
कभी किताबों की गहराइयों में,
खुद को ढूंढ रही हूं..
कभी खिलखिलाती खुशियों के बीच,
कभी रोते हुए गम के संग,
कभी सड़कों पर जमा भीड़ में,
कभी वीरान से दिखते रास्ते में,
खुद को ढूंढ रही हूं..
जोड़ रही हूं वक्त के एक सिरे से दूसरे सिरे को
 हर लमहे में, अब खुद को ढूंढ रही हूं..!!
   
                       -अनुष्का

Comments

  1. Khayaal♥️♥️♥️great work .....

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  2. Very well expressed. Keep it up😍😇

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  3. Ary bdhiya anushka....👌🙏

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  4. Enter your comment...beautiful words..👌👌👌👌

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  5. Mesmerizing ..keep it up dear..👍

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